ऐसी होती है माँ की ममता, 1 दिल छू लेने वाली कहानी

एक माँ की ममता(मातृप्रेम) जानकर आखों में पानी आ जाएगा.
ममता  का अर्थ तो हम सभ जानते है. यही ना कि, एक मां का अपने बच्चों के प्रति स्नेह. पर बहुत सारे लोगों को लगता होगा, प्यार महोब्बत ओर ममता  मे क्या अंतर है. मैं तो कहूंगा अंतर तो कुछ नही,पर जो स्नेह मां अपने ममता के भाव से करती वह दूसरा कोई नही कर पाता है. प्यार-महोब्बत तो सब करते है, पिता से लेकर प्रियकर या प्रेयसी तक पर इन मे वह मां वाला स्नेह नही होता.
mother love
माँ की ममता 
       यह कहानी भी ऐसी ही एक मां कि ममता (मातृप्रेम) की है. इस मां को उसकी ममता  का भाव अपने बच्चों के लिये क्या-क्या करवाता इस का वर्णन किया है.
       दापूर नाम का एक छोटासा अविकसित गांव था. गांव का विकास नही, मतलब गांव मे रहनेवाले लोगों का विकास नहीं. इस गांव मे कुछ तीन-चार परिवार थे, जो थोड़े-बहुत खानदानी थे, बाकी सब मेहनत-मजूरी कर के अपना जीवन गुजारते थे.
        इसी गांव मे दिना नाम कि एक विधवा औरत रहती थी. रहने के लिये छोटासा घर था. दो बच्चे थे, शायद एक पांच साल का और दूसरा तीन साल का होगा. दिना का पति बहुत मेहनती था, वो दिना को किसी चीज कि कमी महसूस नहीं होने देता था, या कैसी भी हालतों में साथ नहीं छोडता था. कैसी भी परिस्थिति हो दोनों साथ मिलकर सामना करते थे. पर कोन जाने किस पर कौनसा अनर्थ कब आ जाए. दिना के जीवन में ऐसी घटना घटी कि, उसी घटना ने दिना के पति को दिना से छीन लिया.
        दिना को पति के गुजरने के बाद ऐसा लगने लगा कि, मैं जिंदा तो हूँ, पर मुझ में जान नहीं है. परिवार चलाने के लिये अब दूसरा कोई नहीं था सिवाय दिना के, इसलिये कैसे भी कर के दिना ने अपने बच्चों के खातिर खुद को उस दुःख से अलग किया. कुछ दिन बाद घर में जो था वो समाप्त हो गया. अब खुद क्या खाये और अपने छोटे बच्चों को क्या खिलायें ये समस्या उसके सामने खडी हो गई.
          बच्चों के लियेे दिना को अभी कुछ काम करना ही था. इसलिये दिना अपने दोनों बच्चों को साथ में लेेेकर जहाँ काम मिलता वहीं जाया करती थी. और दिनभर मेहनत कर के जो भी मजदूरी मिलती, उससे अपना और अपने बच्चों के पेट भरती थी. ऐसा ही समय बितता गया और चलता रहा. लेकिन एक दिन दिना को शरीर में थोडी कमजोरी महसुस होने लगी. फिर भी वह काम पर गई. एसेे ही दो-तीन दिन दिना काम पर जाती रही, लेकिन उसकी शरीर की कमजोरी कुछ ठीक नही हो रही थी , बल्कि और बढती जा रही थी. ऐसे में काम पर जाना दिना के लिये कठिन हो गया. दिना बहुत चिंतित रहने लगी, अगर काम पर नहीं गयीं तो मेरे बच्चे भूखे मर जाएंगे. उसी चिंता ने दिना को और कमजोर कर दिया, इतनी कमजोर कि उठने बैठने के लिये लकडी का सहारा लेना पडता था. इस कारण उसकेे बच्चे भूखे मर रहे थे.
         खाने को कुछ न मिलने के कारण और अपने बच्चों को भूखे मरते देखकर वह लकडी कि सहायता से आज यहां से कुछ मांगा, तो अगले दिन दूसरी ओर से कुछ मांग के अपने बच्चों को खिलाती, पर खुद भूखी सो जाती थीं.
         ऐसे ही एक दिन, वह खुद जा न सकती थी, इसलिए अपने बच्चों को समजा के खाने के लिए कुछ मांगने के लिये गांव में भेज देती है,कुछ समय बाद बच्चे दो चपाती और थोड़ी सी सब्जी लेकर लौटते हैं. दो चपाती से तीन जन कैसे तृप्त होंगे, इसलिये वे दो चपाती दोनों बच्चों को खिला देती हैं. वह बरसात का समय था, बिजली न होने के कारण घर में अंधेरा छाया हुआ था. अंधेरे में ही वह अपने बच्चों को एक कमरे में सूला देती है, और वह दूसरे कमरे में जाकर सो जाती हैं. रात को तेज बारिश होती है. और बिजलियां जोर से कडकडाती है.
       दिना को थोडी आराम मिलती है, इसलिये वह गहरी नींद में पड जाती है, ऐसे में दिना को एक सपना दिखाई देता है, "वह एकदम तंदुरुस्त हो गई हैं, काम पर जाती है. वह सोचती है, अपने बच्चों को काफी समय से अच्छा खिलाया नहीं, इसलिये वह अपने बच्चों के लिए चविष्ट खाना बनाती हैं, बाद में अपने बच्चे और वह साथ में बैठकर खाना खाकर सो जाते है।" आगे सपने में दिना ने देखा, "उसके बच्चे जिस कमरे में सोए हुए थे, उस कमरे का छत गिरकर उनके दोनों बच्चे मर जाते हैं।" सपने में से दिना एकदम उठकर खडी हो जाती है, जान में जान आ जाती है. और अंधेरे में ही अपने बच्चों के कमरे की ओर चल पडती है, कमरे में जाकर अपने बच्चों को देखकर दिना  चैन की सांस लेती हैं. उसी समय दिना को शरीर में ज्यादा कमजोरी महसूस होती है, जिससे वह निचे गिर जाती है. और फिर वहां से उठ ही नहीं पाती है. चैन कि सांस दिना की सांस ले लेती है.
       दोस्तों, यही होती हैं मां की ममता, जो मरते दम तक अपने बच्चों के खातिर जीने का जुनून रखती है. दोस्तों, यह छोटीसी कहानी आपकों कैसी लगी. अपने विचारों को हमारे साथ जरुर शेयर करे. धन्यवाद
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